असफलता के लिये अपने भाग्य को दोष ना दे




मुश्किल दौर से गुजर कर हम क्या बनना चाहते हैं | ये हमारे अपने आप पर निर्भर करता है| हमें अपनी ज़िन्दगी में खुद मेहनत करना चाहिए| हम अपने भाग्य को दोष नहीं दे सकते, अगर हम सफल नहीं हो पा रहे है तो| हमें खुद को बदलना है कुछ करने के लिए, हम जबतक खुद को नहीं बदलेंगे ज़िन्दगी में कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगे|
हमें भूक लगती है तोह हमें खाना खाने कि आवश्यकता पड़ती है| लेकिन खाने से पहले बहुत मेहनत करना पड़ता| हमें रोटी खाना है तो उसको पहले बनाना पड़ेगा उसके लिए पहले आटा गुथना फिर बेलना फिर सेकना तब खाना पड़ता है| उसी तरह हम अगर सोचेंगे बैठे बैठे IAS बन जाए तो कभी नहीं बन पाएंगे| उसके लिए मेहनत करनी पड़ेगी | कोई जरुरी नहीं है कि अगर हम 24 घंटे में 20 घंटे पढेंगे तभी एग्जाम पास करेंगे| नहीं ऐसा बिलकुल नहीं है आप 10 घंटे ही पढ़े लेकिन मन लगा के पढ़े, क्यूंकि जो काम हम मन लगा कर करते हैं , वो काम अच्छा ही नहीं बल्कि जल्दी होता है| परेशानी सबकी ज़िन्दगी में आती है, लेकिन उस परेशानी से डरना नहीं है बल्कि शांत मन से सामना करना है|

जो व्यक्ति सफल थे उनके पास भी 24 घंटे थे और आपके पास भी 24 घंटे हैं| जब वो सफल हो सकते हैं तो आप क्यूँ नहीं | ऐसा नहीं है परेशानी उनकी ज़िन्दगी में नहीं थी, उन्होंने ने भी परेशानियों का सामना किया और आज वो सफल हैं| उसी तरह ये हम पर निर्भर करता है कि हम अपनी परेशानियों को कैसे सँभालते हैं, और अपनी ज़िन्दगी में कैसे कुछ बन सकते हैं|

अच्चा सोचो अच्चा होगा
संवादाता “नीता सिंह “